हजारों चेहरों में एक तुम ही पर मर मिटे हैं वरना, ना चाहतों की कमी थी और ना चाहने वालों की।

चाहत है या दिल्लगी या यूँ ही मन भरमाया है, याद करोगे तुम भी कभी किससे दिल लगाया है। 

 उदास लम्हों की न कोई याद रखना, तूफान में भी वजूद अपना संभाल रखना, किसी की ज़िंदगी की ख़ुशी हो तुम, बस यही सोच तुम अपना ख्याल रखना।

अब आ गए हो आप तो आता नहीं कुछ याद, वरना कुछ हमको आप से कहना ज़रूर था।

तुम मिल गए तो मुझ से नाराज है खुदा, कहता है कि तू अब कुछ माँगता नहीं है।

 लत तेरी ही लगी है, नशा सरेआम होगा, हर लम्हा जिंदगी का सिर्फ तेरे नाम होगा।

 किस किस तरह छुपाऊं अब मैं तुम्हें, मेरी मुस्कान में भी तुम नजर आने लगे हो

 काश एक ख्वाहिश पूरी हो इबादत के बगैर, वो आके गले लगा ले मेरी इजाजत के बगैर।